मेले और त्योंहार

मेले और उत्सव

 

पाली जिला रंगीन मेलों और उत्सवो के लिए जाना जाता है| यहाँ दशहरा, दिवाली, होली, गणेश चतुर्थी, जन्मास्टमी, महावीर जयंती और महा शिवरात्रि आदि पूरी पवित्रता के साथ मनाया जाते है|

बदलते सामाजिक जीवन के साथ मेलों और त्योहारों का महत्त्व भी तेजी से बदल रहा है| जिले के भिन्न-भिन्न स्थानों पर होने वाले अधिकतर मेले मौसमी और धार्मिक है| जिले में आयोजित होने वाले महत्वपूर्ण मेले निम्न प्रकार है|

 

शीतला सप्तमी मेला

 

यह जिले का प्रमुख मेला है जो सोजत में चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी (मार्च-अप्रैल)  को लगता है| लगभग 20,000 श्रदालु “शीतला माता” की पूजा करने के लिए आते है| श्रदालु “माता” के सम्मान में मंदिर में “पुजापा” और अन्य प्रसाद चढ़ाते है| इसके पीछे लोगो में यह धारणा है की ऐसा करने से माता उनके बच्चो को चेचक के बचाती है| शीतला माता का मेला पाली तहसील के बायद, मारवाड़ जं. के ईसाली और बाली तहसील के चनोड गाँव में भी आयोजित होता है|

 

बरकाना पारसनाथ मेला

 

यह मेला देसुरी तहसील के बरकाना गाँव में हर साल पोष माह की दशमी (दिसम्बर-जनवरी) को आयोजित होता है| यहाँ देवता परशुराम का मंदिर है| इसमें लगभग 10,000 श्रदालु पारसनाथ भगवान की श्रदा में एकत्रित होते है|

 

रामदेव मेला

 

यह मेला रायपुर तहसील के बिराटिया गाँव में हर साल भाद्रपद माह में (अगस्त-सितम्बर) आयोजित किया जाता है| यहाँ रामदेव जी का पुराना मंदिर है जहाँ 1 लाख से भी अधिक श्रदालु रामदेव जी की पूजा करने और अपने बच्चो का मुंडन संस्कार करने के लिए आते है| मेले में आने के लिए सबसे नजदीकी रेल्वे स्टेशन सेन्द्रा है| रामदेव जी का मेला मारवाड़ तहसील के सवरद गाँव में भी आयोजित होता है|

 

सेवाड़ी पशु मेला

 

यह मेला बाली तहसील के सेवाड़ी गाँव के समीप आयोजित होता है| यह मेला पोष माह (दिसम्बर-जनवरी) में 5 दिन तक आयोजित होता है| मेले में लगभग 15,000 श्रदालु अपने पशुओ को बेचने और खरीदने के लिए एकत्रित होते है| यहाँ आने के लिए सबसे नजदीकी रेल्वे स्टेशन फालना है|

 

परशुराम महादेव मेला  

 

श्रावण माह की षष्टि और सप्तमी को परशुराम महादेव मंदिर में बड़े मेले का आयोजन किया जाता है| यह सादड़ी में अरावली की पहाड़ियो की चोटी पर स्थित है| 2 लाख से ज्यादा श्रदालु इस मेले में एकत्रित होते है| 

 

पीर दुल्हेशाह मेला

 

यह जोधपुर-पाली रेल्वे रूट के केरला रेल्वे स्टेशन के नजदीक चोटिला में आयोजित होता है| यह दीपावली के अगले दिन हजरत पीर दुल्हेशाह के मजार पर आयोजित होता है|

 

बादशाह की सवारी

 

होली के अगले दिन भिन्न-भिन्न समुदाय के लोग बादशाह की सवारी के जुलुस में शामिल होने के लिए पाली जिले में आते है|

 

शिवरात्रि मेला

 

शिवरात्रि और बैशाखी पूर्णिमा को फलाना और सांडेराव के बीच स्थित "निम्बो का नाथ" मंदिर में यह मेला आयोजित होता है|

 

लक्खी मेला- सोनाना खेतलाजी  

 

चैत्र माह में देसुरी तहसील में स्थानीय नदीं की घाटी में "सोनाना खेतलाजी मंदिर" में मेले का आयोजन होता है| यह मेला पाली जिले की ही नहीं बल्कि पश्चिमी राजस्थान के अन्य जिलो की लोक संस्कृति को भी दर्शाता है| यह होली के त्योहार के बाद में मनाया जाता है, जिसमे काफी संख्या में गैर नर्तक अपने परंपरागत और मनोहर परिधान में भाग लेते है| पर्यटकों को लुभाने के लिए पर्यटक विभाग द्वारा "गोडवाड़ उत्सव" का आयोजन किया जाता है|

गणगौर मेला

 

गणगौर मेला पाली जिले में चैत्र शुक्ल की तीज को पुरे उत्साह के साथ मनाया जाता है| इन मेलों के अलावा महादेव मेला, पूनागर भांकरी मेला, बजरंग बाग, फुलमंडी मेला, हनुमान मेला, बाली पशु मेला, मानपुरा भांकरी मेला, महालक्ष्मी मेला, खिवाडा और चंडावल पशु मेले भी हर साल आयोजित होते है|